gazal our sayri
"हुस्न और महोब्बत का रिश्ता भी अजीब होता हैं,
शमाएं जलती हैं तो
परवाने भी जल जाते हैं..............."प्रेम"
कांटो से मैंने प्यार किया हैं कभी कभी,
फूलों को शर्मसार किया हैं कभी कभी;
अल्लाह रे बेखुदी की तेरे पास बैठकर,
तेरा ही इन्तेजार किया हैं कभी कभी............................."प्रेम"